‘हमें गर्व है कि अच्छी पत्रकारिता कायम है’

न्यूज़लॉन्ड्री हिंदी को रेड इंक पुरस्कार मिलने के अवसर पर एडिटर इन चीफ मधु त्रेहन का संदेश

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न्यूज़लॉन्ड्री की रिपोर्ट ने इस साल मानवाधिकार श्रेणी में रेड इंक अवार्ड जीता है. यह रिपोर्ट न्यूज़लॉन्ड्री के असिस्टेंट एडिटर रहे राहुल कोटियाल ने की है. रिपोर्ट छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में पुलिस बलों द्वारा किये गये एक फर्जी मुठभेड़ पर केंद्रित तीन हिस्सों की श्रृंखला थी. दंडकारण्य, जिसे लाल गलियारा भी कहते हैं, के दुर्गम जंगलों में राहुल ने हफ़्ते भर के प्रवास के दौरान ये जानकारियां इकट्ठा कीं और फिर दिल्ली लौटकर उन्हें तीन हिस्सों की रिपोर्ट का रूप दिया. न्यूज़लॉन्ड्री की स्थापना के कुछ बुनियादी मूल्यों में से एक यह भी रहा है– वो तमाम ग्राउंड रिपोर्ट्स जिन्हें करने से पारंपरिक मीडिया समूह बचते हैं.

राहुल और न्यूज़लॉन्ड्री हिंदी के संपादक अतुल चौरसिया द्वारा बेहद सीमित संसाधनों में हासिल की गयी इस उपलब्धि पर मुझे और पूरी न्यूज़लॉन्ड्री टीम को गर्व है. हमें उन तमाम पत्रकारों पर गर्व है, चाहे वो किसी भी मीडिया समूह से जुड़े हों, जो अपना समय, साधन और कोशिशों को ऐसे काम में झोंक देते हैं जिसे न तो ठीक से पहचान मिलती है, न ही प्रतिष्ठा. सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में- यही तो असली पत्रकारिता है.

हमने न्यूज़लॉन्ड्री हिंदी की शुरुआत बापू की जयंती यानी 2 अक्टूबर, 2017 को एक छोटी सी टीम और बेहद थोड़े से संसाधनों के साथ की थी. वर्तमान न्यूज़ मीडिया की गलाकाट स्पर्धा में मितव्ययी होना भी ज़रूरी है. इसके साथ ही समाचारों की दुनिया में खुद को स्थापित करने के लिए इसकी प्रभावशाली उपस्थिति भी जरूरी है. यह कठिन चुनौती थी जो अतुल के कंधों पर सौंपी गयी. शुरुआत में इनके पास सिर्फ एक सब एडिटर था और चुनौती हिंदी समाचारों की दुनिया में दखल बनाने की थी. हम सबको अहसास था कि यह एक दुरूह चुनौती है. लेकिन शुरुआत से ही न्यूज़लॉन्ड्री टीम न्यूनतम संसाधनों के ज़रिये अधिकतम हासिल करने में सफल रही है. न्यूज़लॉन्ड्री हिंदी ने निराश नहीं किया. टीम ने सिलसिलेवार ऐसी ग्राउंड रिपोर्ट्स की जिनका व्यापक असर हुआ. न्यूज़लॉन्ड्री की स्थापना का पहला ध्येय ही यही था. न्यूज़लॉन्ड्री हिंदी टीम ने बिहार में राम नवमी के मौके पर संगठित रूप से निकाली जा रही हथियारबंद यात्राओं का खुलासा किया, मुज़फ्फ़रपुर के अनाथ आश्रम में लड़कियों के साथ हुए अनाचार की रिपोर्ट ब्रेक की, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले किस तरह से सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को हवा दी गयी आदि, इस तरह की तमाम ग्राउंड रिपोर्ट आयीं.

हम इस मौके पर रेड इंक को भी धन्यवाद देना चाहते हैं कि उन्होंने रिपोर्ट को पुरस्कार के लिए चुना. पुरस्कार निश्चित रूप से पूरी टीम के मनोबल को बढ़ाने के साथ एक स्वस्थ स्पर्धा टीम के भीतर पैदा करते हैं. इस देश में इस तरह की अनगिनत कहानियां हैं जो अभी भी कहे, लिखे जाने के इंतज़ार में हैं. इस देश में ऐसे दर्जनों मीडिया संस्थान हैं जिनकी इस तरह की कहानियों में कोई रुचि नहीं है. थोड़े बहुत ऐसे हैं जो इन्हें करना चाहते हैं. लेकिन इसके लिए इन्हें आपके मदद की दरकार है. न्यूज़लॉन्ड्री हिंदी को भी आपके सहयोग की ज़रूरत है. अच्छी पत्रकारिता को लेकर आप जिन मूल्यों की अपेक्षा रखते हैं, वही दरअसल इस बात का संकेत है कि आप लोकतंत्र को कितना महत्व देते हैं, उसकी कितनी कद्र करते हैं. इस मौके पर हम उन सबको धन्यवाद देते हैं जिन्होंने हमारे ऊपर भरोसा जताया, समर्थन किया. हमें आपके ऊपर गर्व है. राहुल और अतुल पर गर्व है. हमें गर्व है कि पत्रकारिता कायम है.

पुरस्कृत रिपोर्ट्स को नीचे दिये गये लिंक्स पर पढ़ा जा सकता है:

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Complaining about the media is easy and often justified. But hey, it’s the model that’s flawed.

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